कानूनी सलाह या मदद ना मिलने के कारण वर्षों से जेल में बंद बड़ी तादाद में विचाराधीन कैदी 15 अगस्त को हो सकते हैं रिहा - शहरे अमन

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Jul 17, 2022

कानूनी सलाह या मदद ना मिलने के कारण वर्षों से जेल में बंद बड़ी तादाद में विचाराधीन कैदी 15 अगस्त को हो सकते हैं रिहा

नई दिल्ली ब्यूरो:-देश के विभिन्न राज्यों के समस्त जिलों के जेलो में लगभग 3:30 लाख लोग कानूनी सलाह व मदद न मिलने के कारण वर्षों से कारागार में बंद है जिन्हें रिहा करने के लिए केंद्र सरकार गंभीरता पूर्वक विचार कर रही है। यह बात केंद्रीय कानून मंत्री रिजिजू ने जयपुर में 18वी अखिल भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक को संबोधित करते हुए कही ।उन्होंंने आजादी के75वे वर्ष में लंबित पांच करोड़ से अधिक मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी जेल में बंद है जिन को रिहा करने के लिए हम जिला न्यायाधीशों से सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि मैं सभी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों से अपील करता हूं कि वो विचाराधीन कैदियों को कानूनी सलाह व मदद प्रदान करने के अपने प्रयासों को और गति दें जिससे आगामी 15 अगस्त 2022 को या उससे पूर्व आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए अधिक से अधिक संख्या में जेलों में निरूद्ध विचाराधीन कैदियों को रिहा किया जा सके। अपने संबोधन केंद्रीय कानून मंत्री ने क्षेत्रीय भाषाओं को निचली अदालतों में प्राथमिकता देने पर जोर देने की बात कही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में तर्क और फैसले अंग्रेजी में हैं हमारा विचार है कि हाईकोर्ट और निचली अदालतों में भी क्षेत्रीय भाषाओं को वरीयता दी जाए क्योंकि वैसे भी वकील हो सकते हैं जो कानून के जानकार हैं लेकिन अपनी दलील अंग्रेजी में पेश नहीं कर सकते इसलिए स्थानीय भाषाओं को न्यायालय में वरीयता दी जाती है तो इस फैसले से हम कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि यदि मैं अंग्रेजी नहीं बोल सकता तो मुझे अपनी मातृभाषा में बोलने की आजादी होनी चाहिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि केवल अंग्रेजी बोलने वालों को ही अधिक फीस व ज्यादा केस और मान सम्मान मिले मैं इसका विरोध करता हूं मातृभाषा किसी से कम नहीं है अगर हम हाईकोर्ट और निचली अदालतों में स्थानीय भाषा को अवसर देते हैं यह हमारे लिए गर्व की बात होगी।

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